तुम ! (निक्की कविता)

दुःख होता है जब तुम साथ चल कर साथ नहीं देते हो !
दुःख होता है जब तुम अपन छद्म साथ छीन लेते हो !
दुःख होता है जब तुम साथ देने का दिखावा करते हो !
दुःख होता है जब तुम साथ चलने का वादा करते हो !
दुःख होता है .. दुःख होता है .. हाँ मुझे दुःख होता है !

पीड़ित करते हो तुम, जब पी पीछे वार करते हो !
पीड़ित करते हो तुम, जब भाई बोल रंजिश करते हो !
पीड़ित करते हो तुम, राजनीति के दावं खेलते हो !
पीड़ित करते हो तुम, जब चाणक्य नीति चलते हो !
पीड़ित करते हो तुम, हाँ तुम मुझे पीड़ित करते हो !

कभी तो निभाया करो फ़र्ज़, बड़ा तुम खुद को कहते हो !
कभी तो चुकाओ कर्ज, जो मांग अक्सर ले जाते हो !
कभी तो बढाओ प्यार, जो सोहार्द तुम हमसे चाहते हो !
कभी तो ना खींचो टाँगे, साथ जो तुम चलाना चाहते हो !
कभी तो .. कभी तो .. भाई कह .. भाईचारा निभाओ !

– बलविंदर सिंघ बाईसन