एक व्रत यह भी रख लिया करो ! (निक्की कहानी)

एक व्रत यह भी रख लिया करो ! (निक्की कहानी)
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सुरेश : आज क्या बात है, सुबह सवेरे तैयार हो कर बै गयी हो ? (हर समय पति सुरेश को गुस्से से बोलने वाली अंजू आज तैयार हो कर बड़े ही प्यार से शांत बै ी थी)

अंजू : आज मैंने तुम्हारी लम्बी उम्र के लिए व्रत रखा है, पूरा दिन भूखा रहना पड़ता है ! तुम मर्दों को क्या पता की हम औरतें तुम्हारे लिए क्या क्या नहीं करतीं ! पुण्य और प्रशाद एक साथ ! तुम्हारी लम्बी आयु भी मांग ली और उपवास भी हो गया जिससे शरीर भी निरोग रहेगा !

सुरेश : सुबह सवेरे सरगी (अन्न त्याग का आडम्बर करके ) तो तुमने खा ही ली थी ना ? तो फिर उपवास किस प्रकार हुआ और साथ ही शाम को आलू के रूप में शरीर की जरूरत से बहुत ज्यादा कैलोरी तो तुम खा ली लोगी ! हाँ, फायदा एक जरूर हुआ है मुझे, की तुम आज चुपचाप बै ी हो और लड़ाई नहीं कर रही !

अंजू : बस तुम रहने ही दो अपने ये ढकोसले ! तुम्हें क्या पता की मैं तुम्हे कितना प्यार करती हूँ ! (सुबकने लगती है)


सुरेश : अगर प्यार करती हो तो भागवान, हफ्ते में एक दिन मौन-व्रत रख लिया करो ! मौन व्रत सभी कर्मकांडों से ज्यादा कार्य करेगा ! अगर तुम हफ्ते में एक दिन भी चुप बै गयी तो मेरी उम्र कितनी बढ़ जायेगी इस के बारे में तुम सोच भी नहीं सकतीं ! एक व्रत यह भी रख लिया करो ! (जोर से हँसता है)

अंजू : तुम भी ना हमेशा ही मजाक उड़ाया करो मेरी भावनाओं का ! पंडताइन कहानी सुनाई है करवा की की कैसे उस रानी का पति मर गया था इस व्रत को गलत ढंग से तोड़ने के कारण !

सुरेश (थोडा गंभीर हो कर) : देख अंजू, कहानियों को कहानी ही रहने दे ! वहम-भरम को बढ़ावा देने के लिए ही पुजारी श्रेणी ने बहुत सारे कर्मकांड शुरू करवाए ! क्योंकि इनका हलवा-मांडा चलता है इन परस्पर विरोधी कहानियों से ! खाना पीना तो पवित्र है, और जीवन-मृत्य परमेश्वर के हुकम में ! अगर इस त्यौहार को मनाने का कोई औचित्य है तो फिर इस इस त्यौहार को मर्दों को मनाना चाहिए क्योंकि घर, कपडे, बर्तन, बच्चे, पति, ससुराल और बहुत सारी जिम्मेदारियां एक औरत ही सक्षम तरीके से संभालती है और अपने पति को आज़ाद महसूस करवाती है ! पति मर जाए तो एक औरत बच्चे अकेले ही पाल लेती है पर एक मर्द को तो जैसे बेहोशी ही छा जाती है ! इसलिए घर में औरत की लम्बी आयु मांगनी चाहिए !

अंजू (सुरेश के गले लग कर) : तुम सही कहते हो ! प्यार दीर्घ होना चाहिए, आयु तो भगवान् के हाथ है ! व्रत की शर्त पर भगवान् नहीं पसीजते ! [गाना गाती है] "हम बनें, तुम बनें, इक दूजे के लिए" ! (दोनों एक दुसरे को देख कर मुस्कुराते हैं)

- बलविंदर सिंघ बाईसन