आज के दो बैलों की कथा ! (निक्की कहानी)

ये आज कल भारत की राजनीति को क्या हो रहा है ? जहाँ देखो आप की ही चर्चा है ! पुराने खिलाड़ी तो हाशिये पर ही खड़े नज़र आ रहे हैं ! क्या भविष्य होगा देश का ? (रमेश भारत की राजनीति पर चर्चा कर रहा था)

सुरेश (हँसते हुए) : जैसे मुंशी-प्रेम चंद जी की कहानी के हीरा-मोती बैल ने सामने आये सांड के साथ किया; वैसा ही कुछ होने की उम्मीद लगती है मुझे !

सुरेश (विस्मय से) : अब ये बीच में “दो बैलों की कथा” कैसे आ गयी ? बात तो भारत की राजनीति की हो रही थी !

सुरेश : मुझे तो लगता है की “आप” उस कहानी के सांड़ की तरह हाथी जैसा शक्तिशाली हो चूका है। उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है, लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नजर नहीं आती। हीरा-मोती की कहानी की तरह इन दो बैलों (कांग्रेस-भाजपा) में एक एक करके सांड (आप) से लड़ने की हिम्मत ना होगी; और कहानी कुछ इस तरह आगे बढ़ेगी …(मुंगेरी लाल की तरह सपनों में खो जाता है) …. !!

कांग्रेस ने चिंतित स्वर में कहा-‘अपने घमंड में फूला हुआ है, आरजू-विनती न सुनेगा।’

भाजपा : ‘ तो फिर कोई उपाए सोचो जल्द!’

कांग्रेस : ‘उपाय यह है कि उस पर दोनों जने एक साथ चोट करें। मैं आगे से रगेदता हूँ, तुम पीछे से रगेदो, दोहरी मार पड़ेगी तो भाग खड़ा होगा। मेरी ओर झपटे, तुम बगल से उसके पेट में सींग घुसेड़ देना। जोखिम तो है, पर दूसरा उपाय नहीं है।

दोनों बैल (पार्टियाँ) जान हथेली पर लेकर लपके ! सांड़ (आप) को भी संग ित शत्रुओं से लड़ने का तजुरबा न था। आखिर बेचारा जख्मी होकर भागा और दोनों मित्रों ने दूर तक उसका पीछा किया। यहां तक कि सांड़ बेदम होकर गिर पड़ा। तब दोनों ने उसे छोड़ दिया। दोनों मित्र जीत के नशे में झूमते चले जाते थे और गाना गाते थे ..

प्यार का वादा .. फिफ्टी फिफ्टी ! क्या है इरादा .. फिफ्टी फिफ्टी !
आधा आधा … फिफ्टी फिफ्टी ! हम दोनों बराबर, कम ना ज्यादा फिफ्टी फिफ्टी !

(रमेश जोर से सुरेश को चिकोटी काटता है, सुरेश चिहुंक कर सपने से बाहर आ जाता है )

क्या आने वाले लोक सभा चुनावों में कुछ ऐसा होने वाला है ? अगर हाँ तो फिर सांड को सचेत होना होगा और ज्यादा मजबूती से अपने पांव ज़मीन पर रखने होंगे ! वर्ना “दो बैल एक सांड को धुल चटा देने को एक हो जायेंगे .. चाहे अपनी जान बचाने के लिए ही सही !” (मैं भी क्या क्या सोचता रहता हूँ … कहते हुए सुरेश रमेश से विदा लेता है)

- बलविंदर सिंघ बाईसन