मैं भी एम.पी. बनूँगा ! (निक्की कहानी)

अरे मैंने सुना है की तुम ने भी आप पार्टी ज्वाइन कर ली है ? (रमेश ने सुरेश से पूछा)

सुरेश : हाँ भाई ! एम्.पी. के चुनाव के लिए सबसे सस्ता, कामयाबी की 90% गारंटी वाला और तेज़ रास्ता आजकल “आप पार्टी” ही जो है !

रमेश : मतलब ? तो तुम देश सेवा और निस्वार्थ राजनीति के लिए “आप ” ज्वाइन नहीं कर रहे ?

सुरेश : इस काम के लिए उनकी संग ित बेस टीम पहले से ही है ! दूसरी पार्टियों से इस चुनाव को लड़ना हो तो भाई .. करोड़ो खर्च करवा कर भी भाई-भतीजा ही पहले विचारा जाता है ! सफलता का शॉर्टकट है आज की तारीख में “आप” !

रमेश : ओह … तो अब सियार भी शेर की खाल पहन कर राजा बनने के ख़्वाब देखने लगे हैं ! लेकिन याद रखना मेरे भाई ! विधान सभा का चुनाव तो लोग झाड़ू और केजरीवाल के नाम पर जीत गए ! पहले दूसरी पार्टियों ने इन्हें बच्चा समझा था पर अब टक्कर कांटे की होगी और साम-दाम-दंड-भेद की नीतियों का खुल कर प्रयोग होगा ! चाणक्य नीति के नज़ारे इस लोक सभा चुनाव में देखने को मिलेंगे, जब पुराने “खिलाड़ी” अपनी चालों से हवा और निजाम को बदलने की कोशिश करेंगे !

सुरेश : जीत गए तो वाह वाह ! वर्ना गवांया क्या ? इनकी पी पर बै कर नदी पार करेंगे ! पार हो गयी तो हम राजा !! वर्ना क्या लेकर आये थे ? क्या लेकर जायेंगे ? हम तो “गेम का बंटाधार करने गए थे, यह कहकर, जहाँ से आये थे, वहीँ वापिस चले जायेगे ! भाई.. हम तो वो “नाले” हैं जो किसी भी नदी में समां जायेंगे ! हमारी गंदगी नदी में घुल जायेगी और पानी सफ़ेद ही नज़र आएगा ! (कुटिल हंसी हँसता है)

रमेश (कुढ़ता हुआ) : तुम जैसे तिगडमी एवं मतलबी लोगों के कारण ही बाकी पार्टियों में “मैला” आ चूका है और उनकी हालत दिल्ली में बहती हुए यमुना जैसी दिखने लगी है जिसे साफ़ करना भी आज नामुमकिन लगता है ! इन “आप” वालों को जल्दबाजी से नहीं बल्कि सोच-विचार कर ही अपने प्रतिनिधि चुनने चाहिए वर्ना इनकी “साफ़ राजनितिक नदी” भी एक गन्दा नाला बन कर रह जायेगी !

- बलविंदर सिंघ बाईसन