शिकार पर घात ! (निक्की कहानी)

अरे तुमने सुना, वो कोने के घर वाला सुरेश कल मर गया !

शराब पी रहे चारों दोस्तों की आँखों में सुरेश की खूबसूरत बीबी सुनीता घूमने लगी !

जाने कब से “शिकार पर घात” लगाए “शिकारियों” की लार टपकने लगी थी, अब शिकार करना आसान हो जो गया था !

गरीब की जोरू सबकी भाभी ! कुत्सित हंसी हँसते हुए उनकी आँखों के लाल डोरे कुछ ज्यादा ही लाल हो गए थे ! सभ्य कहलाने वाले समाज की सभ्यता मौका पाते ही नंगी हो गयी थी !

उधर जंगल में एक शेर कमजोर शिकार छांट कर हमला करने ही वाला था !

- बलविंदर सिंघ बाईसन