फ़ित्ना-गर ! (निक्की कविता)
हर गलती का जिम्मेदार वो हमे बना जाते है,अपनी खता की सजा भी हमे ही सुना जाते है !लब हमारे तहजीब में खामोश जाते है अक्सर,वो हर वाह-वाह पर अपना हक जता जाते है !जिंदगी उनकी शुरू खुद पर, खत्म खुद पर,दूसरों...
हर गलती का जिम्मेदार वो हमे बना जाते है,अपनी खता की सजा भी हमे ही सुना जाते है !लब हमारे तहजीब में खामोश जाते है अक्सर,वो हर वाह-वाह पर अपना हक जता जाते है !जिंदगी उनकी शुरू खुद पर, खत्म खुद पर,दूसरों...
एकता कि मिसाल देने वाले खुद अन्दर से खण्डित है !अज्ञानता के महान पिण्ड आज कहलवाते पण्डित हैं !दुष्ट नमक-हराम हैं हमप्याला, शरीफ तो कम्पित हैं !आम आदमी पल में फांसी, नेता के केस लम्बित हैं !...
अपने मुंह बडबोले, पर हैं कान के कच्चे !अन्दर झूठ कपट अहंकार, बनते सच्चे !पंथक सुपरमैन उड़ते मनमती हवाओं में !खाकी निक्कर, ऊपर हैं सिख्खी कच्छे !जब जरूरत हों तो फेंकते बातों के लच्छे !खुद को बाप समझते, ...
आज तक जिसे भी भगवान् समझा,वही कच्ची मिटटी का बुत निकला !मोह माया से दूर रहो, जो था कहता,खुद गले तक डूबा लक्ष्मी पुत्र निकला !नशे शराब को जी भर भर था जो कोसता,कमरे में बोतल से एक घूँट कम निकला !जो देता...
वो तो कातिल है, उनसे इन्साफ की उम्मीद कैसी ?तुम ने भी अपना बन कर कौन सा तीर मार दिया ?कातिल से इन्साफ माँगना हमारी वक्ती मजबूरी है !तुम भी बस अपने बन कर भावनाओं से खेलते रहे !उसने हुकूमते दुश्मन बन नि...