A space for stories that matter

Every life hides a powerful story

Short stories, poems & fearless ideas

ਹਰ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਹੈ ਇੱਕ ਨਿੱਕੀ ਕਹਾਣੀ
Balvinder Singh Bison

कुत्सित टी.आर.पी. ! (निक्की कहानी)


सुना है की विवादस्त ब्यान देने वाले उस नेता ने माफ़ी मांग ली है ? (तात्कालिक राजनीतक हलचल पर अपने मित्र मनोज कुमार से बात करते हुए श्रीवास्तव जी बोले)

मनोज (हँसते हुए) : अब माफ़ी मांगे क्या होत जब चिड़िया ले गयी टी.आर.पी. ! सांप के निकल जाने के बाद लकीर पीटने का कोई मतलब नहीं होता ! वैसे भी राजनितिक शतरंज पर यह घृणा का खेल पूर्वनियोजित तथा नियंत्रित है तथा आम जनता की समझ से ऊपर होता है !

श्रीवास्तव : मतलब ?

मनोज : हमारा समाज और मीडिया अक्सर ऐसे कुत्सित बयानों पर गलत तरीके से उत्तेजित होता है और किसी टी.बी. के वायरस के वाहक की तरफ अखबार, मुंह-जुबानी और मीडिया मुद्दे को घर घर पहुंचा देता है ! परन्तु उसके बाद अगर उन्मादी माफ़ी मांगता है तो उसे उसी तत्परता से रेखांकित नहीं किया जाता ! उन्मादी अपनी घृणा और धार्मिक उन्माद फैलाने वाले सन्देश को एक झटके में ही देश भर में फैला देता है जो एक "गुप्त सन्देश" की तरह सभी पार्टी कार्यकर्ताओं और पिठ्ठूओं तक पहुँच जाता है ! भाई वैसे भी, नुक्सान होने के बाद झूठे मुंह माफ़ी मांगी तो क्या मांगी ! तुमने सुना नहीं की शिकारी जब शिकार पकड़ने जंगल जाता है तो कैसे झुक कर (छुप कर) शिकार खेलता है ? और हम उसके झुकने को उसकी विनम्रता समझ ले तो हम से ज्यादा मूर्ख कौन होगा ?

श्रीवास्तव (सर हिलाते हुए) : सब टी.आर.पी. का खेल है और कौन नहीं जानता की जितनी ज्यादा किसी प्रोग्राम की टी.आर.पी. होती है, उतना ज्यादा ही उसकी कीमत हो जाती है ! राजनितिक फायदे नुक्सान के इस खेल में मरना तो आम जनता ने ही होता है , नेता लोग तो अपनी वशिष्ट सुरक्षा में जिंदगी का आनंद लेते रहते है ! वैसे भी जब जब चुनाव का बिगुल बजता है तो धार्मिक जहरीले उन्मादी अपने कुत्सित इरादों के फन फैला कर आम जनता को डसने निकल पड़ते हैं !

मनोज (गंभीर हो कर) : इस राजनितिक गंद को हटा कर अगर देश को स्वच्छ बनाना है तो सबसे पहले पूरे देश को साक्षर बनाना चाहिए, क्योंकि पढ़े लिखे लोग सोच विचार कर अपने नेताओं को चुनेंगे, जिस प्रकार विकसित देशो में होता है ! साक्षरता से ही हर प्रकार की स्वच्छता जन्म लेती है !

Leave a Comment

Reader Comments