चरणचुंबक ! (निक्की कविता )
तड़प रहे हैं चरणों में लोटने को चरणचुंबक !
खुद को समझें देव, दूसरों को समझें शम्बूक !
पालतू हैं धार्मिक लबादे में लिपटे, समझे चम्पक !
क्या अनपढ़ और पढ़े लिखे, निकल रहे लम्पट !
नीरो बजाता था बांसुरी, हीरो बजाये ढोल ट्रम्पेट !
विश्व सियासत में हर कोई भर रहा ट्रम्प का पेट !
कुर्सी के खेल में हर कोई बन बैठा है कठपुतली पपेट !
झूठ की थाली परोस रहे, सच हो रहा है पूरा डाइलेक्ट !
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