अश्वत्थामा मारा गया! (निक्की कहानी )
राजा ने रण भूमि में ऐलान किया : अश्वत्थामा मारा गया नरोः न कुंजरो । परन्तु अश्वत्थामा मारा गया के तुरंत बाद शंख बजाकर नरोः न कुंजरो की आवाज दबा दी गई। सारी सेनाओं और जनता में खलबली मच गई।
हजारों साल बीत गए।
राजा बदले, राज बदले, दरबार बदले…
लेकिन ऐलान करने की कला वही रही।
आज भी सत्ता कहती है कि
“अश्वत्थामा मारा गया!”
और सच्चाई अक्सर उसके पीछे धीरे से फुसफुसाती है कि
“...नरोः न कुंजरो
जनता पहले शब्द सुनती है,
फिर धीरे-धीरे बाकी वाक्य समझती है।
कहने को कुछ और,
करने को कुछ और,
सत्ता का यह खेल नया नहीं,
बस दरबार बदलते रहे हैं।
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