उदाहरण ! (निक्की कहानी )
“ये कहानी सच है या सिर्फ़ एक लोककथा?”
उसने पूछा।
बुज़ुर्ग मुस्कुराए :
“बेटा, हर कहानी को सच साबित करना जरूरी नहीं होता।”
“फिर ऐसी कहानियाँ सुनाते क्यों हैं?”
“किसी बात को आसानी से समझाने के लिए।”
“लेकिन लोग तो कहानी के नाम और पात्रों पर ही बहस करने लगते हैं!”
बुज़ुर्ग हँस पड़े :
“यही तो मज़ेदार बात है।
उदाहरण तो चाँद की तरफ इशारा करती उंगली है।
लोग उंगली पर ही बहस करते रह जाते हैं और चाँद देखना भूल जाते हैं!
कहानी स्थानीय हो, ऐतिहासिक हो या पौराणिक :
जरूरी यह नहीं कि उसमें कौन था,
जरूरी यह है कि उससे हमें क्या समझाया जा रहा है।
बच्चे ने पूछा : “तो कहानी सिर्फ़ एक माध्यम है?”
बुज़ुर्ग बोले : “बिल्कुल!
माध्यम को ही मंज़िल मत बना लेना…
वरना बात समझाने वाला समझाता रह जाएगा,
और लोग कहानी के पात्रों में ही उलझे रहेंगे!”
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