एक सच्चा सबक ! (निक्की कहानी)
एक नौजवान हर रोज़ गुरुद्वारे आता था, लेकिन सेवा करते हुए अक्सर गलतियाँ कर देता था। साथ में सेवा कर रहे बुज़ुर्ग सेवादार उसकी हर गलती पर उसे पीठ थपथपा कर सही तरीका समझा देते थे।
एक दिन उसने एक बुज़ुर्ग सेवादार से पूछा :
“बाबा जी, मैं इतनी गलतियाँ करता हूँ… फिर भी आप मुझे कभी सबके सामने नहीं डाँटते?”
बुज़ुर्ग ने मुस्कुराकर कहा :
“बेटा, अगर हम तेरी हर गलती सबको बताकर तुझे नीचा दिखाएँ या हर बात पर डाँटते रहें, तो शायद गलती तो ठीक हो जाएगी, लेकिन तेरा हौसला और विश्वास टूट सकता है।”
नौजवान चुप रहा।
बुज़ुर्ग ने मुस्कुराकर कहा :
“बेटा, सेवा सिर्फ़ फर्श साफ़ करने का नाम नहीं। किसी का मन टूटने से बचाना भी एक सेवा है।”
फिर उन्होंने धीरे से कहा—
“सांझु करीजै गुणह केरी, छोडि अवगुण चलीऐ ॥”
नौजवान ने झाड़ू फिर हाथ में उठा ली…
लेकिन इस बार वह फर्श से ज़्यादा उसके अंदर भीतर की धूल साफ़ करने जज़्बा था !
Leave a Comment