ब्रह्म कवच ! (निक्की कहानी)
मुझे ढकोसला प्रसाद जी ने गुरबाणी में से ब्रह्म कवच का पाठ दिया है, वो मुझे रोज़ करना है, फिर तीन हफ्ते में ही मेरे बिगड़े हुए काम बन जायेंगे ! (जयंत ने अपने मित्र गुरजीत सिंघ को अपनी तकलीफों के बारे में बताते हुए कहा)
गुरजीत सिंघ (हैरानी से) : गुरबाणी में से ब्रह्म कवच का पाठ ?
हाँ भाई ! उन्होंने बताया है कि इसे पढने से लाखों लोगों को फायदा हुआ है !
गुरजीत सिंघ : मैं समझ गया ! ढकोसला प्रसाद के बारे में मैंने पहले भी सुना था पर आज तेरी बातों से मुझे समझ आ गया कि वो आम लोगों को मूर्ख बनाने में माहिर ठग है ! क्योंकि गुरबाणी इन सब पाखण्ड कर्मों का खंडन करती है ! गुरबाणी में इस नाम से कोई पाठ नहीं, पर हाँ ब्रह्म कवच सिख्खों में भ्रम पैदा करने के लिए पैदा किया जा रहा है ! पर वो भूल जाते है कि "गुरप्रसाद भ्रम का नास"
मैं समझ गया कि सिख्खो को हर उस बात से बचना है जो भ्रम पैदा करती है, और एक परमात्मा से दूर ले जाती है ! (गुरजीत सिंघ ने कहा)
- बलविन्दर सिंघ बाईसन
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