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ਹਰ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਹੈ ਇੱਕ ਨਿੱਕੀ ਕਹਾਣੀ
Balvinder Singh Bison

बुलडोजर ! (निक्की कविता)

बुलडोजर चले हरी घास पर, नारंगी तालियां मारे !

अब आया नारंगी का नंबर, तब क्यों चीखें मारे ?

बैसंतर देव पुकारें, जब लगे पड़ोसी के द्वारे !

बचाओ बचाओ चिल्लाएं, जब आग पहुंचे अपने द्वारे !

तू ना समझ मतवाली आग को किसी का भी सगा !

आग लगाने वाले राजनीतिज्ञ हैं, दे देते हैं दगा !

जो मुसलमान पड़ोसी के साथ हुआ, तेरे साथ भी होगा !

स्वर्ण मृग (हिंदू राष्ट्र) के चक्कर में, खा गये हो धोखा !

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