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Balvinder Singh Bison

बिट्टू !! कौन है ये आदमी ? (Third Degree)

दिल्ली की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चूका है ! सौ सालों से चाणक्य नीति को घोल कर आजमाने वाली कांग्रेस को राजनीति के एक नवजात शिशु ने आईना दिखा दिया है ! बी.जे.पी. + अकाली दल जैसी (धर्म पर राजनीति) करने वाली राष्ट्रीय और प्रादेशिक पार्टियों के जय-जय उदघोष को लगाम लगाने और उसे आम आदमी के विश्वास को जीतने की नयी राह एक धर्म-निरपेक्ष (अगर आगे भी रहे तो) पार्टी ने सिखा दी है !

अभी तक सभी पार्टियाँ, अखबार, चैनल और संपादक जिसे कल का छोकरा बत्ताते हुए "आप" के कार्यों को बचकाना बता रहे थे, वही आज "विजयोत्सव" में शामिल हो उन्हीं कार्यों को विजेता की रणनीति बता रहे है !

अब कुछ खरी खरी कहते हुए देखते हैं की क्या खुद केजरीवाल को इस अप्रत्याशिक जीत का आभास था ? जी हाँ था ! क्योंकि भीड़ में से वही आदमी सिर बाहर निकालता है जो सिर पर अन्डे खाने से नहीं डरता ! आम आदमी पार्टी के झाड़ू की पहचान को आम आदमी ने वोट दे समर्थन दिया, इस बात से सबसे ज्यादा गर्व और अहंकार कौन करेगा, जी हाँ "आप" के वो आम उमीदवार जिन्हें उनके अपने इलाकों में कोई नहीं जानता था !

उन लंगड़े घोड़ों पर दांव खेलकर और भरोसा रखकर अरविन्द केजरीवाल ने अपनी ठोस सोच को नए आयाम दिए हैं ! वो सब उमीदवार अब सेनापति बन कर अपनी छाती ठोक रहे हैं और सोच रहे हैं की उनके कारण ही यह जीत हासिल हुई है ! परन्तु यह समय छाती ठोकने का नहीं बल्कि एक साथ बैठ कर सोचने का है ! यह जीत है विचार धारा की, एक आन्दोलन की और देश के युवा के विचारों की ! यह जीत है .. भारत की कुलिष्ट राजनीति को कुलीन करने की इच्छाशक्ति की !

धरातल पर रहते हुए उन सेनापतियों को चलना होगा ! जिस झाड़ू ने उन्हें बुहार कर एकत्रित किया है उसके प्रति उन्हें आभारी होना होगा ! उन्हें याद रखना होगा अपना इतिहास क्योंकि अभी तो केवल शुरुआत है, असल खेल तो खेला जाना बाकी है ! शब्दों के जाल अभी बुने जाने बाकी हैं ! आरोपों-प्रत्यारोपों की खेप आगे आने ही वाली है ! शक्ति और सोच का प्रदर्शन अभी बाकी है ! गाँव से शहर आयी नयी नवेली दुल्हन को अभी यहाँ के तौर तरीके सीखने है, वर्ना मुंह खोलते ही फूहड़ता अपना रूप दिखा जायेगी !

पुराने दिग्गजों को हराने के बाद "आप के नये सेनापति" यह सोचने को सोचे भी नहीं की यह उनकी निजी जीत है ! यह जीत है झाड़ू की ! यह जीत है अरविन्द केजरीवाल की दूरदृष्टि की वर्ना लोग तो इन सेनापतियों के बारे में यही कहते थे की ...

"बिट्टू ! कौन है ये आदमी ?"

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