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ਹਰ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਹੈ ਇੱਕ ਨਿੱਕੀ ਕਹਾਣੀ
Balvinder Singh Bison

काला चश्मा ! (निक्की कहानी)

राह चलता राजपाल दाना चुगते पक्षियों को देख पुल्कित हो उठा ! उसकी निगाह अचानक एक छोटे बच्चे पर गयी जो पक्षियों के साथ बैठ कर उनके भोजन का स्वाद उठा रहा था ! अपने फटे कपड़ो में गरीबी और बेचारगी की मूरत बना वह बच्चा अपने नन्हें हाथों से मुठ्ठी भर भर कर बाजरा खा रहा था ! (उसका मन करुणा से भर उठा)

भाग भिखारी यहाँ से ! (अचानक उसका ध्यान एक ऊँची आवाज़ ने आकर्षित किया)

राजपाल ने देखा की कबूतरों को दाना डालते हुए एक आदमी से उसका कबूतरों का खाना चुराना बर्दाश्त ना हुआ था और उसने बच्चे को एक गन्दी सी गाली निकालते हुए कान से पकड़ कर वहां से भगा दिया !

राजपाल का दिल तड़प उठा; उससे रहा ना गया और वो उस आदमी के पास जा पहुंचा !

राजपाल : क्या बात हो गयी भाई साहब ! आपने क्यों उस गरीब को भगा दिया ?

आदमी : अरे कुछ नहीं जी ! ज्योतिषी ने बताया था की पक्षियों को दाना खिलाने से मेरे बिगड़े कुंडली के दोष दूर हो जायेंगे ! ये पक्षी दाना खायेंगे और मुझे दुआ देंगे ! ये कमबख्त लड़का पता नहीं कहाँ से आ गया बीच में; मेरे दान का बंटाधार करने के लिए !

राजपाल के कानों में उसके कहे शब्द साएं.. साएं गूंजने लगे ! उसे लगा की राहू-केतु के डर से बच्चे में विद्यमान भगवान को शायद वो शख्स पहचान ही नहीं पाया ! प्रभु खुद चल कर उसका भोजन खाने आये थे और वो बदनसीब ज्योतिषी द्वारा पहनाये गए अंधविश्वास का काला चश्मा पहने भगवान को पहचान नहीं पाया !

उधर वो छोटा बच्चा अपने सूखे शरीर और भूखे पेट के साथ अगले मौके के तलाश में छुप कर सूनी सूनी आखों से बाजरे की तरफ टकटकी लगाए बैठा था !

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