भारत का रहने वाला हूँ ! (निक्की कहानी)
अरे सुना तूने ? नागपुर के एक संतरे ने ऐलान किया है की क्योंकि नागपुर में संतरे ज्यादा पैदा होते हैं इसलिए देश के सभी फलों को संतरा कहना चाहिए ! (रमेश ने अपने मित्र रणजीत सिंघ से कहा)
फिर तो जंगल के सभी हिरणों को भी ऐसा ही ऐलान कर देना चाहिए की क्योंकि जंगल में हिरणों की संख्या ज्यादा है इसलिए सभी जानवर चाहे वो शेर हो या हाथी, भविष्य में हिरण के नाम से ही जाने जायेंगे ! (हँसते हुए रणजीत सिंघ ने कहा)
तुम दोनों ने क्या बकवास लगा रखी है ? (बीच में टोकते हुए करतार सिंघ ने टोका)
रणजीत सिंघ (हँसते हुए) : अगर यह बकवास है तो फिर "एक सनकी नेता" क्या कह रहा है ? देश के सविंधान और देश की मुद्रा (करेंसी) पर देश का नाम भारत (इंडिया) है और सांस्कृतिक रूप से समृद इस देश में रहने वाले सभी धर्म के लोग भारतीय (इंडियन) कहलाने में गर्व महसूस करते हैं ! अब कोई एक बहुसंख्यक धर्म का नेता खड़ा हो कर बकवास करे की बाकी धर्म के लोग भी उसके धर्म के नाम पर जाने जाएँ तो एक धर्म-निरपेक्ष देश में ऐसा कहने वाले को "देश की अखंडता को भंग करने का दोषी" मानना चाहिए या नहीं ?
रमेश : आप ठीक कह रहे हो रणजीत सिंघ जी ! हमारे नेताओं को धार्मिक सौहार्द को बढावा देने वाली बाते कहनी चाहिए पर हो इसका उल्ट रहा है ! अपने ही धर्म को सर्वश्रेष्ट समझने की भूल किसी महामारी की तरह सब धर्मों में घुस चुकी है !
करतार सिंघ (सहमति देते हुए) : धर्म तो फूलों के समान होते हैं जो अपनी विवधता और खुशबू से बाग़ को खुशनुमा और खूबसूरत बना देते हैं ! पता नहीं कुछ लोग क्यों अपने मुंह से विष्टा रुपी दुर्गन्ध त्यागते हैं ? पता नहीं क्यों वो अपने धर्मान्धता में हँसते खेलते चमन में आग लगाते रहते हैं ? पता नहीं क्यों ? पता नहीं क्यों ?
सभी मिल कर बोलते हैं "हम ऐसे मंसूबो को कामयाब नहीं होने देंगे और आपस में प्रकुति और फूलों की तरह प्यार से रहेंगे !" दूर कहीं गाने की आवाज़ आ रही थी "है प्रीत जहाँ की रीत सदा, मैं गीत वहाँ के गाता हूँ. भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ "
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