शादी का विज़न! (नन्ही कहानी)
रवि ने दोस्त से पूछा,
“यार, शादी किससे करनी चाहिए?”
दोस्त बोला,
“जिससे प्यार हो।”
रवि ने कहा,
“बस?”
“हाँ भाई, प्यार सबसे ज़रूरी है।”
रवि हँस पड़ा :
“फिर तो शादी के बाद पता चलता है कि प्यार तो था… लेकिन बिजली का बिल, EMI और घर की जिम्मेदारियाँ भी थीं!”
दोस्त चुप।
रवि बोला,
“शादी सिर्फ ‘तुम मेरे हो’ कहने का नाम नहीं है।
ये ‘हम दोनों मिलकर क्या बनाएँगे?’ का सवाल है।”
“मतलब?”
“प्यार दिल जोड़ता है…
लेकिन घर समझ, जिम्मेदारी, भरोसे और साझा सोच से चलता है।”
दोस्त ने पूछा,
“तो रोमांस?”
रवि मुस्कुराया : “वो भी रखो भाई…
लेकिन सिर्फ रोमांस के भरोसे पूरी जिंदगी चलाने निकलोगे, तो पहली बारिश में छाता ढूँढते फिरोगे!”
शादी में प्यार जरूरी है,
लेकिन प्यार के साथ दिशा भी जरूरी है।
वरना दो लोग साथ रहते हुए भी अपनी-अपनी जिंदगी जीते रहते हैं।
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